नई दिल्ली:- अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा के बाद बाजू प एक धागा बांधा जाता है, जिसमें 14 गांठें होती है, इसे अनंत सूत्र कहा जाता है।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस धागे में 14 गांठ ही क्यों लगाई जाती है। आखिर इन गांठों का क्या अर्थ है और इसे बांधने की परंपरा क्यों है?
क्या होता है अनंत सूत्र?
अनंत सूत्र आमतौर पर पवित्र धागे से घर पर ही गूथ कर तैयार किया जाता है और पूजा के बाद इसे बाजू पर बांधा जाता है। कहा जाता है कि इस सूत्र में भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप छुपे होते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के साथ यमुना और शेषनाग की पूजा की जाती है।
14 गांठों का अर्थ
अनंत सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं। इन 14 गांठों को 14 लोकों का प्रतीक माना गया है। यानी यह सूत्र केवल एक धागा नहीं, बल्कि हिंदू धर्म में बताए गए 14 लोकों का प्रतीकात्मक धागा है। इसी वजह से अनंत सूत्र की हर गांठ का विशेष महत्व होता है और पूजा के बाद इसे श्रद्धा से धारण किया जाता है। इसे धारण करना सुरक्षा, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना से जुड़ी आस्था का हिस्सा माना जाता है।
7 ऊर्ध्व लोक
सत्य लोक- सबसे ऊंचा लोक, ब्रह्मा जी से जुड़ा माना जाता है।
तप लोक- तपस्वी और उच्च आध्यात्मिक अवस्था वाले प्राणियों का लोक।
जन लोक- ऋषियों और मुनियों से संबंधित माना जाता है।
मह लोक- महान ऋषियों का निवास माना जाता है।
स्वर्ग लोक- इंद्र आदि देवताओं से जुड़ा लोक।
भुवर लोक- पृथ्वी और स्वर्ग के बीच का लोक माना जाता है।
भू लोक- पृथ्वी का लोक, जहां मनुष्य और अन्य जीव रहते हैं।
7 अधोलोक
अतल लोक
वितल लोक
सुतल लोक
तलातल लोक
महातल लोक
रसातल लोक
पाताल लोक
अनंत चतुर्दशी पर क्यों खास है यह धागा?
‘अनंत’ का अर्थ है जिसका न आदि है और न अंत। इसलिए अनंत सूत्र को भी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। अनंत चतुर्दशी का संबंध गणेश उत्सव के समापन से भी है, इसलिए इस दिन जहां एक ओर गणपति जी का विसर्जन किया जाता है, तो वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
