फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, 15 दिनों में चौथी बार तेल का झटका, आखिर क्या अभी और बढ़ेंगे दाम…

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नई दिल्ली:– 25 मई को तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में एक और बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। पिछले दो हफ्तों के भीतर यह चौथी बार है जब पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा किया गया है। इस ताजा बढ़ोत्तरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों ने 100 रुपये का आंकड़ा छू लिया है, जिससे रोजमर्रा के बजट पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

ताजा रिवीजन के बाद, देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपए प्रति लीटर बढ़कर 102.12 रुपए पर पहुंच गई है। इसी तरह, डीजल की कीमतों में भी 2.71 रुपए प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया गया है, जिसके बाद दिल्ली में एक लीटर डीजल के लिए अब 95.20 रुपए खर्च करने होंगे। तेल कंपनियों के अनुसार, पिछले 76 दिनों तक कीमतें स्थिर रखने के बाद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
Strait of Hormuz बंद होने से वैश्विक बाजार में हाहाकार
ईंधन की कीमतों में इस अचानक आई तेजी के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। इस संघर्ष के चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल को पार कर गई हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ओएनजीसी की निदेशक सुषमा रावत के अनुसार, जब तक इस क्षेत्र में शांति समझौते की उम्मीद नहीं दिखती, तब तक कीमतों में यह उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

कोलकाता और मुंबई में पेट्रोल 110 रुपए के पार
इस ताजा बढ़ोत्तरी के बाद देश के अन्य प्रमुख महानगरों में भी ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं:

कोलकाता: यहां पेट्रोल में 2.87 रुपएऔर डीजल में 2.80 रुपए की वृद्धि हुई है, जिससे पेट्रोल अब 113.51 रुपए और डीजल 99.82 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
मुंबई: मायानगरी में पेट्रोल की कीमत 2.72 बढ़कर 111.21 रुपए और डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई है।
चेन्नई: यहां पेट्रोल 107.77 रुपए और डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।
तेल कंपनियों का दावा है कि वे हर दिन लगभग 1000 करोड़ का घाटा उठा रही थीं, जिसे लंबे समय तक सहना संभव नहीं था, इसलिए अब इस बढ़ती लागत का भार उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। आने वाले दिनों में अगर अंतरराष्ट्रीय हालात नहीं सुधरे, तो कीमतों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है।