कोरबा:–राजस्व अमले की कार्यवाही में खुला काला खेल, जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर फल फूल रहा था अवैध कारोबार आखिर खनिज विभाग को क्यों नहीं लगी भनक ? जिले के अंतिम छोर ग्राम कोटमेर्रा में राजस्व विभाग की बड़ी कार्यवाही ने अवैध रेत कारोबार के उस नेटवर्क की परतें खोल दी है ,जो लंबे समय से प्रशासनिक निगाहों से दूर नहीं बल्कि सवालों की घेरे में संचालित होता प्रतीत हो रहा था। तहसीलदार वीरेंद्र श्याम के नेतृत्व में हुई छापेमार करवाई में लगभग 100 से 150 ट्रैक्टर ट्राली के बराबर अवैध रूप से भंडारित रेत जप्त की गई है। कार्यवाही के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, वही खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था और कार्य प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित कोटमेर्रा में इतने बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण कोई एक-दो दिन का काम नहीं माना जा सकता। ऐसे में सवाल उठ रहा है, कि जब राजस्व विभाग को सूचना मिल सकती है तो खनिज विभाग को इन अवैध कारोबार की भनक आखिर क्यों नहीं लगी ? क्या विभागीय निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय था, या फिर कहीं ना कहीं मिली भगत की आशंकाओं को भी बल मिल रहा था ?
राजस्व विभाग के अनुसार, सुभाष अग्रवाल नामक व्यक्ति द्वारा बिना किसी वैध अनुमति, रियलिटी पर्ची अथवा शासकीय स्वीकृति के भारी मात्रा में रेत का भंडारण किया गया था। गुप्त सूचना पर पहुंचे तहसीलदार वीरेंद्र श्याम ने मौके पर जांच कर अवैध भंडारण की पुष्टि की और तत्काल तपती की कार्यवाही करते हुए पंचनामा तैयार कराया।
कार्यवाही के दौरान सामने आया एक और घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि राजस्व टीम के पहुंचने से ठीक पहले भंडारण स्थल से एक जेसीबी मशीन हटा दी गई। आखिर मशीन किसकी थी उसे किसने हटावाया और सूचना लीक कैसे हुई,यह अब जांच का विषय बन गया है। प्रशासन ने इस पहलू को भी गंभीरता से जांच के दायरे में लिया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के नदी नालों से लंबे समय से अवैध उत्खनन और रेत का संग्रहण किया जा रहा था । इससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने के साथ-साथ शासन को राजस्व की भारी क्षति पहुंच रही थी। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से रेत माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते गए।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कलेक्टर द्वारा अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश लगातार दिए जा रहे हैं, तब भी जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में रेत माफियाओं का नेटवर्क किस संरक्षण में फल फूल रहा है ? कोटमर्रा की कार्यवाही ने न केवल अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा किया है ,बल्कि निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाने वाले विभागों की जवाब देही पर भी बहस छेड़ दी है।
तहसीलदार वीरेंद्र श्याम ने स्पष्ट किया है कि अवेद्युत खनन परिवहन और भंडारण के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी कीमत पर बक्सा नहीं जाएगा
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