नई दिल्ली:– भारत में कलाई, पैर या कमर में काला धागा पहनने की परंपरा काफी पुरानी है। बच्चे के जन्म से ही काला धागा पहनाया जाता है। कई लोग इसे बुरी नजर से बचाव का माध्यम मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था, ज्योतिषीय मान्यता या पारिवारिक परंपरा के कारण पहनते हैं। बच्चों के हाथ-पैर या कमर में भी कई घरों में काला धागा बांधा जाता है।
हालांकि काले धागे को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। इसलिए इसे पहनने से पहले इससे जुड़े धार्मिक और ज्योतिषीय नियमों को जानना जरूरी है।
बुरी नजर से बचाव की मान्यता
जिन लोगों को बार-बार बुरी नजर लगने की आशंका रहती है या जिनके काम में लगातार बाधाएं आती हैं, वे काला धागा पहनते हैं। इसे नकारात्मक प्रभावों से बचाव के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है। खासकर भारतीय परिवारों में छोटे बच्चों के हाथ, पैर या कमर में काला धागा बांधा जाता है। मान्यता है कि इससे बच्चे को बुरी नजर से बचाया जाता है।
हर किसी के लिए काला धागा पहनना उचित नहीं?
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार काला धागा हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। खासकर जिन लोगों की कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत होती है या जिन्हें किसी विशेष ग्रह से जुड़े उपाय बताए गए हों, उन्हें बिना ज्योतिषीय सलाह के काला धागा नहीं पहननी चाहिए।
हालांकि अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में इसके नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या ग्रह संबंधी उपाय का पालन कर रहे हैं, तो उसी की निर्धारित विधि को प्राथमिकता देना बेहतर है।
पुरुष और महिलाएं किस हाथ में पहनें?
काले धागे को किस हाथ में बांधना चाहिए, इसे लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं हैं। एक प्रचलित परंपरा के अनुसार पुरुष दाहिनी कलाई और महिलाएं बाईं कलाई में काला धागा बांध सकती हैं। वहीं कुछ परिवारों और परंपराओं में इसे किसी भी हाथ में पहना जा सकता है। इसलिए यदि आप किसी विशेष धार्मिक परंपरा का पालन करते हैं, तो उसी के नियमों के अनुसार काला धागा पहनना उचित माना जाता है।
काला धागा बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काला धागा साफ और सही स्थिति में होना चाहिए। यदि धागा अपने आप टूट जाए या बहुत पुराना और घिसा हुआ हो जाए तो उसे बदलने की परंपरा है। कई लोग मंगलवार या शनिवार को काला धागा बांधना शुभ मानते हैं। हालांकि इसका नियम हर परिवार और क्षेत्र में अलग हो सकता है।
बच्चों को काला धागा बांधते समय सावधानी
बच्चों को काला धागा बांधते समय यह जरूर ध्यान रखें कि वह बहुत ज्यादा कसा हुआ न हो। धागे से त्वचा पर जलन, लालिमा या ब्लड फ्लो में परेशानी न हो। किसी भी धार्मिक मान्यता से अधिक बच्चे की सुरक्षा और सुविधा जरूरी है।
