कोरबा रामलीला में श्रीराम राज्याभिषेक से पूर्व का प्रसंग श्रद्धा के साथ जीवन की गहरी सीख भी दे गया। राजसभा में महाराज दशरथ की प्रशंसा के बीच उन्होंने दर्पण के माध्यम से आत्ममंथन का संदेश दिया। उन्होंने समझाया कि जब चारों ओर प्रशंसा हो, तब स्वयं को परखना सबसे अधिक जरूरी है। व्यक्ति को विचार करना चाहिए कि क्या वह वास्तव में उन गुणों के योग्य है, जिनके लिए उसका गुणगान किया जा रहा है।
इसके बाद गुरु वशिष्ठ श्रीराम को अगले दिन होने वाले राज्याभिषेक की सूचना दी। प्रसंग में श्रीराम की विनम्रता, गुरु के प्रति सम्मान और मर्यादापूर्ण आचरण ने आदर्श जीवन का संदेश दिया।
रामलीला की सीख: प्रशंसा से अहंकार नहीं, आत्ममंथन जागना चाहिए। पद प्रतिष्ठा नहीं, जिम्मेदारी है और सच्ची महानता विनम्रता, धर्म तथा कर्तव्यपालन में निहित है।