9 या 10 सितंबर, कब है लड्डू गोपाल की छठी जानें पूजा की विधि और कान्हा को क्या लगाएं भोग…

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नई दिल्ली:– 4 सितंबर 2026 को पूरे देशभर श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया गया। अब लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाएगी। धार्मिक एवं लोक मान्यता के अनुसार, छठी की परंपरा नवजात बच्चे के जन्म के छठे दिन मनाए जाने वाले संस्कार से जुड़ी मानी जाती है।

इसी भक्तिभाव से कृष्ण भक्त बाल कृष्ण की भी छठी मनाते हैं। इस दिन लड्डू गोपाल को छोटे बच्चे की तरह सजाते और सवारते है और उनके स्वस्थ,सुखी जीवन की कामना की जाती है।
किस दिन है लड्डू गोपाल की छठी?
ज्योतिष पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 2026 में लड्डू गोपाल की छठी 9 सितंबर, बुधवार को मनाई जा रही है। जबकि कुछ जगहों पर छठी का पर्व 10 सितंबर को भी मनाया जा रहा है।

कान्हा जी की छठी कैसे मनाई जाती है?
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद लड्डू गोपाल को उठाकर उन्हें दूध में जल मिलाकर स्नान कराएं।

इसके बाद लड्डू गोपाल को विशेष रुप से पीले रंग के वस्त्र पहनाएं।

उसके बाद उनके लिए घर पर ही काजल बनाएं और उन्हें अपनी छोटी उंगली से लगाएं।

इसके बाद उनकी आरती करें और उन्हें बिना प्याज लहसुन से बना भोजन का ही भोग लगाएं।

लड्डू गोपाल की छठी के भोग के लिए कढ़ी, चावल, माखन मिश्री, धनिया की पंजीरी और खीर को भोग जरूर लगाएं।

हर भोग में तुलसी दल जरुर डालें। अपने हाथों से उन्हें पुरी श्रद्धा के साथ भोग लगाएं।

लड्डू गोपाल की छठी विशेष रुप से शाम के समय मनाई जाती है।

लड्डू गोपल को झूले पर बैठाएं और उन्हें झूला झुलाएं और फिर उनके भजन गाएं।

फिर कुछ पैसे लेकर लड्डू गोपाल के ऊपर से वार फेर करें और प्रसाद परिवार को बांट दें।

लड्डू गोपाल की छठी मनाने का मुख्य संदेश
लड्डू गोपाल की छठी मनाने का मुख्य संदेश केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के प्रति वात्सल्य और प्रेम प्रकट करने का शुभ अवसर है।

इस दिन घर में भक्ति, आनंद और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रेम, करुणा और धर्म के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।