पेट्रोलियम Export Duty Hike से डीजल इतने रुपये और ATF 12.50 रूपये प्रति लीटर महंगा, नई कीमतें आज से लागू…

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नई दिल्ली:– केंद्र सरकार ने सोमवार को ईंधन के निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए नई दरों की घोषणा की है। राजस्व विभाग के नोटिफिकेशन के मुताबिक डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगेगी। इसके साथ ही एविएशन टरबाइन फ्यूल या एटीएफ के निर्यात पर भी 12.5 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है। पेट्रोल के एक्सपोर्ट ड्यूटी में सरकार की तरफ से फिलहाल किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है।

घरेलू खपत के लिए बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क की दरें भी पहले की तरह बिल्कुल स्थिर रखी गई हैं। सरकार द्वारा जारी की गई ये सभी संशोधित दरें मंगलवार यानी आज से ही देश भर में लागू हो गई हैं। सरकार ने आम जनता को भरोसा दिलाया है कि इस बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं की जेब पर कोई भी बुरा असर नहीं पड़ेगा। भारत के घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह अहम और बड़ा फैसला लिया है।
हर पखवाड़े होती है समीक्षा
पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 27 मार्च से विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया था। इसके साथ ही सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लगाना भी उसी समय से शुरू किया था। इन सभी दरों की हर पखवाड़े यानी 15 दिन पर समीक्षा होती है और कच्चे तेल की औसत कीमतों पर बदलाव होता है। इससे पहले एक जून को दरों में संशोधन किया गया था जिसके बाद अब यह नई दरें लागू की गई हैं।
ईंधन की कोई कमी नहीं
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को आम जनता को आश्वस्त किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की कमी नहीं है। संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सभी नागरिकों और उद्योग जगत से ऊर्जा का बहुत ही जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने बड़े इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कंज्यूमर्स से कहा कि वे अपने उपभोक्ता पंपों से ही सीधे तौर पर अपना डीजल खरीदें। ऐसा करने से आम जनता के लिए खुले रिटेल आउटलेट पर भारी दबाव कम होगा और लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी।

खपत के पैटर्न में बदलाव
पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई स्थिर बनी हुई है और देश की सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से लगातार काम कर रही हैं। समस्या की असली जड़ खपत के पैटर्न में आया वह अचानक बदलाव है जिसने बाजार में इस ईंधन की भारी मांग को बढ़ा दिया। मई महीने में लगभग 42 करोड़ लीटर डीजल, जो पहले बल्क पंपों के जरिए जाता था, अचानक रिटेल आउटलेट की ओर शिफ्ट हो गया। इस भारी शिफ्ट की वजह से ही कुछ जगहों पर सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें और परेशानियां स्पष्ट रूप से देखने को मिली थीं।
200 लीटर की नई लिमिट
आम उपभोक्ता को बचाने के लिए 11 जून को जारी बजट अधिसूचना के तहत रिटेल पर डीजल की बिक्री की नई लिमिट तय हुई। अब कोई भी व्यक्ति रिटेल पंप से एक दिन में केवल 200 लीटर तक ही डीजल की सीधी खरीदारी आसानी से कर सकता है। इंडस्ट्रियल और कमर्शियल उपभोक्ताओं को अपने लिए निर्धारित किए गए पंपों से ही सीधे तौर पर पूरी सप्लाई लेने का कड़ा निर्देश है। यह कोई कमी नहीं बल्कि करीब 90 दिनों की एक अस्थायी व्यवस्था है जो नागरिकों को असुविधा से बचाने के लिए लागू की गई है।