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प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा हथौड़ा, मेरिट लिस्ट निरस्त अब नए सिरे से बनेगी ये सूची…

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मध्य प्रदेश :– हाईकोर्ट ने बुधवार को प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 से जुड़े बड़े मामले में 13,089 चयनित शिक्षकों की मेरिट सूची निरस्त कर दी। 5 प्रतिशत बोनस अंक विवाद पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने पूरी मेरिट लिस्ट नए सिरे से तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने गैर-आरसीआई अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने का आदेश भी दिया है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों के पास आरसीआई (भारतीय पुनर्वास परिषद) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा नहीं है, उन्हें 5 प्रतिशत बोनस अंक का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने राज्य शासन और कर्मचारी चयन मंडल को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी अपात्र उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया से बाहर किया जाए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कही बड़ी बात
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि आरसीआई से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा के बिना किसी भी अभ्यर्थी को 5 प्रतिशत बोनस अंक का लाभ नहीं मिल सकता। कोर्ट ने राज्य शासन और कर्मचारी चयन मंडल को अपात्र उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने के निर्देश दिए। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि गलत जानकारी देकर लाभ लेने वालों को बाद में सुधार का मौका देना ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। ऐसे उम्मीदवारों को विकल्प देने से बेईमानी को बढ़ावा मिलेगा।
आरसीआई को लेकर कोर्ट में लगाई गई थी याचिका
दरअसल, नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया समेत अन्य अभ्यर्थियों ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नियमों के अनुसार केवल आरसीआई से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को ही 5 प्रतिशत बोनस अंक मिलना था, लेकिन मेरिट सूची में करीब 14,984 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में बताकर अतिरिक्त अंक प्राप्त कर लिए। जबकि आरसीआई के रिकॉर्ड के मुताबिक मध्य प्रदेश में केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। इसी अंतर को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

सिर्फ हां पर टिक करने से मिले बोनस नंबर
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों से न तो आरसीआई रजिस्ट्रेशन नंबर मांगा गया और न ही संबंधित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की अनिवार्यता रखी गई। केवल ऑनलाइन आवेदन में ‘हां’ विकल्प चुनने पर सॉफ्टवेयर के माध्यम से सीधे 5 प्रतिशत बोनस अंक जोड़ दिए गए।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने करीब पांच महीने पहले ही बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों द्वारा बोनस के लिए दावा किए जाने को संदिग्ध बताया था। बावजूद इसके समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे मेरिट सूची विवादों में घिर गई। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से आलोक वागरेचा और विशाल बघेल ने पैरवी की।