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बाँस की टोकरी से दीपावली के उपहार तक, स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी, कलेक्टर ने कारीगरों और महिला समूहों को दिया बाजार से जोड़ने का भरोसा

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कोरबा, :- जिले में जनजातीय परिवारों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय महिलाओं के पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ने की दिशा में सेवा संकल्प अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की गई। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें बाँस से निर्मित उपयोगी एवं सजावटी सामग्री, सूपा, टुकनी, टोकरी, कुम्हारों द्वारा तैयार खिलौने, कोसा वस्त्र तथा वनोपज से तैयार खाद्य सामग्री सहित अनेक पारंपरिक उत्पादों को प्रदर्शित किया गया।


प्रदर्शनी में स्थानीय उत्पादों की विविधता ने न केवल कोरबा की समृद्ध जनजातीय एवं पारंपरिक कला की झलक दिखाई, बल्कि इन उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने की संभावनाओं को भी सामने रखा। जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले इन उत्पादों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले तथा भविष्य में इन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध हो सके।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और उनसे जुड़े कारीगरों तथा महिला समूहों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल फॉर वोकल’ के आह्वान के अनुरूप स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं।


उन्होंने कहा कि यह पहल केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य जनजातीय परिवारों, बिरहोर समाज, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे पारंपरिक उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध कराना है, ताकि इनसे जुड़े लोगों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर तैयार हो सकें।

’दीपावली में स्थानीय उत्पादों से सजेगा उपहार का संसार’

कलेक्टर श्री दुदावत ने स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाले स्व-सहायता समूहों और महिलाओं को आगामी दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए बाँस से आकर्षक और उपयोगी उपहार तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर उपहार देने की परंपरा को स्थानीय उत्पादों से जोड़ा जा सकता है। बाँस से तैयार आकर्षक टोकरियां, सजावटी सामग्री, उपयोगी वस्तुएं और अन्य उपहार सामग्री तैयार कर इन्हें बाजार में उपलब्ध कराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ऐसे उत्पादों को प्रोत्साहित करने और उनके लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में सहयोग करेगा। इससे स्थानीय महिलाओं और कारीगरों को त्योहार के अवसर पर अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल सकेगा और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी।
कलेक्टर ने कहा कि बाँस से बने उत्पादों की सजावट और दैनिक उपयोग के क्षेत्र में अच्छी मांग है। स्थानीय कला और पारंपरिक उत्पादों में रोजगार एवं आजीविका की व्यापक संभावनाएं हैं। जिला प्रशासन की कोशिश है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं सहित इन कलाओं से जुड़े कारीगरों को आजीविका का बेहतर साधन उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने प्रदर्शनी में लगाए गए स्थानीय उत्पादों को जिला प्रशासन द्वारा क्रय किए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि प्रयास है कि उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं और कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले और उनका पारंपरिक हुनर स्थायी आजीविका का माध्यम बने।
उन्होंने बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत आगामी 7 अक्टूबर को भी स्थानीय उत्पादों से संबंधित प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसके माध्यम से स्थानीय उत्पादों को और अधिक लोगों तक पहुंचाने तथा बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

’बाँस के उत्पादों की अपनी अलग पहचान’
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर ने कहा कि बाँस से तैयार उत्पादों की अपनी अलग पहचान और मांग है। इन उत्पादों को तैयार करने वाले जनजातीय परिवारों, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय कलाकारों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में इस तरह के आयोजन उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय कला और हुनर को बाजार मिलने से इससे जुड़े परिवारों की आजीविका को मजबूती मिलेगी।
एमआईसी सदस्य एवं पार्षद नरेंद्र देवांगन ने कहा कि जनजातीय समाज और स्थानीय कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उनके पारंपरिक उत्पादों को बाजार से जोड़ना आवश्यक है। प्रधानमंत्री द्वारा ‘लोकल फॉर वोकल’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक आजीविका को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री से इन उत्पादों को पहचान मिलने के साथ ही इनके निर्माण से जुड़े कारीगरों और महिला समूहों को आय के नए अवसर मिलेंगे। सूपा, टुकनी, टोकरी सहित बाँस से तैयार पारंपरिक वस्तुओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर बाजार तक पहुंचाने से इनकी मांग और उपयोगिता को और बढ़ाया जा सकता है।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधि गोपाल मोदी, कुमारी डिंपल भेड़िया सचिव एवं व्यवहार न्यायाधीश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन, ट्राइफेड के संदीप शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी उपस्थित रहे।