नई दिल्ली:– सावन का महीना आते ही खान-पान से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं चर्चा में आ जाती हैं। इन्हीं में से एक मान्यता है कि इस दौरान कढ़ी, दही या अन्य खट्टी चीजों का सेवन कम करना चाहिए। कई परिवारों में बड़े-बुजुर्ग सावन में कढ़ी खाने से बचने की सलाह देते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसके अपने कारण बताए जाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक वजहें भी हो सकती हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति को सावन में कढ़ी पूरी तरह छोड़ दे। इसकी मात्रा, बनाने का तरीका और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर इसका सेवन किया जा सकता है।
बारिश के मौसम में पाचन तंत्र रहता है संवेदनशील
सावन का महीना आमतौर पर मानसून के दौरान आता है। इस मौसम में वातावरण में नमी अधिक होने के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। साथ ही, पाचन तंत्र की कार्यक्षमता भी अन्य मौसमों की तुलना में कुछ धीमी हो सकती है। ऐसे में दही से बनी कढ़ी, यदि ताजा न हो या लंबे समय तक बाहर रखी गई हो, तो यह पेट संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।
दही और खट्टी चीजें बढ़ा सकती हैं परेशानी
कढ़ी का मुख्य घटक दही होता है। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में दही का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह कफ बढ़ाने वाला माना जाता है। जिन लोगों को सर्दी-जुकाम, एलर्जी, साइनस या गले की समस्या रहती है, उनमें दही से बनी चीजें कुछ मामलों में असहजता बढ़ा सकती हैं। हालांकि, यह प्रभाव हर व्यक्ति में समान नहीं होता।
एसिडिटी और गैस की हो सकती है समस्या
कढ़ी में बेसन और दही दोनों का इस्तेमाल होता है। कुछ लोगों में इनका संयोजन गैस, अपच या एसिडिटी की समस्या पैदा कर सकता है, खासकर जब भोजन पहले से ही भारी या तला-भुना हो। यदि कढ़ी अधिक मसालेदार या ज्यादा खट्टी बनाई गई है, तो संवेदनशील पाचन वाले लोगों को असुविधा महसूस हो सकती है।
अगर खानी है कढ़ी, तो रखें इन बातों का ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आपकी पाचन शक्ति अच्छी है और कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या नहीं है, तो सावन में भी ताजी और अच्छी तरह पकी हुई कढ़ी सीमित मात्रा में खाई जा सकती है। कढ़ी हमेशा ताजा दही से बनाएं और इसे लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न रखें। बहुत ज्यादा खट्टी दही का इस्तेमाल करने से बचें। इसके साथ हल्का भोजन करें ताकि पाचन पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
धार्मिक मान्यता भी है एक कारण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शिव की आराधना का महीना माना जाता है। इस दौरान सात्विक भोजन करने और तामसिक या भारी भोजन से बचने की परंपरा रही है। कई लोग व्रत और पूजा-पाठ के कारण भी दही और उससे बने कुछ व्यंजनों का सेवन सीमित कर देते हैं। हालांकि, यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।
