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भारत के संविधान की मूल प्रति कहां रखी है? आसान शब्दों में यहां समझें सबकुछ

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नई दिल्ली : संविधान को 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया। इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी 1950 की तिथि चुनी गई।

भारतीय संविधान को विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान माना जाता है। भारतीय संविधान को आधिकारिक तौर पर 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इस दिन को हर साल गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत की विविधता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। इसकी सुरक्षा और संरक्षण में इस्तेमाल की जाने वाली आधुनिक वैज्ञानिक विधियां इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। संविधान से जुड़ी कई रोचक और महत्वपूर्ण बातें हैं। जैसे दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान आखिर रखा कहां हैं?

26 जनवरी को क्यों लागू हुआ संविधान?

संविधान को 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया। इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी 1950 की तिथि चुनी गई। कारण था कि 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में घोषित किया था। इस ऐतिहासिक दिन की स्मृति में यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी को ही संविधान लागू कर भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया जाए। भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं।

भारतीय संविधान की विशेषताएं

भारतीय संविधान की मूल प्रति हाथ से बनी कागज़ पर लिखी गई है।
इसे शांति निकेतन के कलाकारों द्वारा कलात्मक रूप से सजाया गया।
प्रत्येक अध्याय के पहले पृष्ठ पर एक अनोखी कलाकृति है।
संविधान के हर पन्ने पर सोने की पत्तियों का सुंदर फ्रेम है, जो इसे विशिष्ट बनाता है।

संविधान की मूल प्रति का संरक्षण

संविधान को लंबे समय तक संरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यह हाथ से लिखा गया है और इसके कागज खास तरीके से तैयार किए गए हैं। फलालेन के कपड़े में लपेटकर इसे नेफ्थलीन बॉल्स के साथ रखा गया।

वर्तमान में संविधान का संरक्षण
संविधान की मूल प्रति को संसद भवन के पुस्तकालय में नाइट्रोजन गैस के एक विशेष चैंबर में रखा गया है।
यह चैंबर वैज्ञानिक विधियों से तैयार किया गया है ताकि इसे नमी, तापमान, और कीटों से बचाया जा सके।
नाइट्रोजन गैस चैंबर संविधान के कागज को ऑक्सीकरण और अन्य रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बचाने में मदद करता है।

संविधान के निर्माण की प्रक्रिया

संविधान निर्माण के लिए 299 सदस्यों वाली संविधान सभा का गठन किया गया। 2 साल, 11 महीने और 18 दिनों के कठिन परिश्रम के बाद संविधान तैयार हुआ। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर थे।