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नारी-श्रद्धा, पारिवारिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम है ये व्रत…

नई दिल्ली:– हमारी संस्कारधानी के बड़ों से सुना है कि दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। वसुधैव कुटुम्बकम् अर्थात संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार हैसनातन संस्कृति में जीव-जंतु और पेड़-पौधों की पूजा केवल धार्मिक आस्था…

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