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बच्चा करता है बात-बात पर शिकायतें तो डांटे नहीं, समझें वजह

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नई दिल्ली : बच्चे आपसे अक्सर किसी-न-किसी की शिकायत करते रहते हैं। कई बार आप उन्हें डांटकर चुप करा देती हैं, मगर वास्वत में इसका उनके कोमल मन पर बुरा असर पड़ सकता है।

‘मम्मी, यह अच्छा नहीं बना है, मुझे नहीं खाना।’ ‘मां, मुझे गर्म नहीं, ठंडा दूध चाहिए।’ ‘पापा, आज मेरे दोस्त ने मेरी पसंद का गेम नहीं खेला।’ ‘पापा, भाई मुझे मारता है, फिर भी मम्मी उसे नहीं डांटतीं।’ क्या आपका बच्चा भी ऐसी कई सौ शिकायतों की पोटली लेकर आपके आस-पास मंडराता रहता है? अगर हां तो बेवजह छोटी-छोटी बातों पर नाराज होकर शिकायत करना उसके व्यवहार और भविष्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

बच्चे आपसे अक्सर किसी-न-किसी की शिकायत करते रहते हैं। कई बार आप उन्हें डांटकर चुप करा देती हैं, मगर वास्वत में इसका उनके कोमल मन पर बुरा असर पड़ सकता है।

क्या है असल वजह

कुछ बच्चे ज्यादा ही संवेदनशील होते हैं और छोटी-छोटी बातों पर प्रतिक्रिया देते हैं। यही उन में शिकायत करने का कारण भी बनती है। वहीं कुछ बच्चों में झूठी शिकायत करके अपने भाई-बहन या दोस्तों को डांट पड़वाने की आदत होती है। इसलिए पहले शिकायतों की सच्चाई को जानें।

ध्यान आकर्षित करना

बच्चे में हर समय शिकायत करने की आदत कई मामलों में ध्यान आकर्षित करने का एक तरीका भी होती है। ऐसा करके बच्चा चाहता है कि दोस्त, माता-पिता और शिक्षक उसे सुनें, उस पर ध्यान दें और उसकी समस्याओं को सुलझाएं।

छोटे झगड़े, बड़ी सीख

बच्चे खेल-कूद के दौरान होने वाले छोटे-छोटे झगड़ों से कई ऐसी बातें सीखते हैं, जो जिंदगी भर उनके काम आती हैं। ऐसे में आप उन्हें समझाएं कि छोटी-छोटी बातों के लिए शिकायत न करें, बल्कि उसे खुद ही सुलझाने की कोशिश करें।

असंतुष्टि की भावना

मन में असंतुष्टि की भावना होना, शिकायत करते रहने का सबसे जरूरी पहलू है। इसलिए आपको बच्चे की इस असंतुष्टि के बारे में जानने का प्रयास करना चाहिए।

सुनें पूरी बात

सबसे पहले आप यह समझने की कोशिश करें कि क्या बच्चे को वास्तव में कोई परेशानी है या नहीं। ऐसा इसलिए कि बच्चों में यह तय करने की क्षमता नहीं होती कि कौन-सी बात या स्थिति शिकायत योग्य है और कौन-सी नहीं। ऐसे में माता-पिता की यह जिम्मेदारी है कि बच्चे पर नजर रखें और उसे समझने की कोशिश करें।

खुद में सुधार

कई बार माता-पिता भी अपने कामों में इतने उलझे रहते हैं कि बात-बात पर एक-दूसरे से शिकायत करने लगते हैं। ऐसे में बच्चा भी उनको देखकर यह व्यवहार अपना लेता है। उसे लगता है कि गुस्सा आने या मन खराब होने पर शिकायत करना जरूरी है। इसलिए बच्चे के सामने किसी की भी शिकायत करने से बचें और अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने का प्रयास करें।

सीखते हैं आपके आचरण से

फैमिली रिलेशनशिप काउंसलर शोभना कहती हैं, सात साल की उम्र तक बच्चा जो भी सीखता है, वही जीवन भर उसके काम आता है। इसलिए इस उम्र तक माता-पिता को अपने बच्चे की हर बात को सुनना चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे कोई भी आहत न हो। कई मामलों में बच्चे के कामों के लिए माता-पिता एक-दूसरे को दोष देने लगते हैं, जो कि अपरिपक्वता की निशानी है। इस कारण बच्चा सोचता है कि उनसे शिकायत करने का कोई फायदा नहीं है और वह अपने मामले खुद ही सुलझाने का प्रयास करने लगता है। इस स्थिति में कई बार बच्चे के लिए नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए बच्चे से संपर्क बनाए रखें, क्योंकि बच्चे आपकी बातों से नहीं, बल्कि आप के आचरण से सीखते हैं।