नई दिल्ली : एप्पल कंपनी के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरीन पॉवेल जॉब्स महाकुंभ में शामिल होने के लिए भारत आई थीं, हालांकि कुंभ की भयंकर भीड़ देखकर वह घबरा गईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लॉरीन को एगोराफोबिया नामक समस्या है। आइए इसके बारे में जानते हैं।
आपने अपने आसपास के कई लोगों को ज्यादा ऊंचाई पर या लिफ्ट में, संकरी या बंद जगहों पर जाने से डरते हुए देखा होगा। इस तरह का स्थितियों को आमतौर पर फोबिया माना जाता है। इसी तरह से एगोराफोबिया नामक एक समस्या इन दिनों काफी चर्चा में हैं। कारण एप्पल कंपनी के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरीन पॉवेल जॉब्स हैं।
लॉरेन महाकुंभ में शामिल होने के लिए भारत आई थीं, हालांकि कुंभ की भयंकर भीड़ देखकर वह घबरा गईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लॉरीन को एगोराफोबिया नामक एक समस्या है, जिसमें व्यक्ति को भीड़भाड़ वाले जगहों या ऐसी परिस्थितियों का डर होता है जहां से मुश्किल पड़ने पर भाग निकलना मुश्किल हो सकता है।
एगोराफोबिया एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार है, जिसके कारण रोगी को एंग्जाइटी या इसके कारण कई प्रकार की शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। एगोराफोबिया की समस्या आपके दैनिक जीवन के कामकाज को भी प्रभावित करने वाली हो सकती है। आइए इस फोबिया के बारे में समझते हैं।
एगोराफोबिया के बारे में जानिए
एगोराफोबिया एक प्रकार का स्ट्रेस डिसऑर्डर है। जिन लोगों को ये दिक्कत होती है उन्हें उन जगहों या स्थितियों से डर लगता है जिसके कारण वह फंस सकते हैं जहां से निकलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे लोगों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से दिक्कत हो सकती है।
इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि एगोराफोबिया के शिकार लोगों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, बंद जगहों पर रहने, लाइन में खड़े होने या भीड़ में होने से डर लग सकता है। एगोराफोबिया से पीड़ित अधिकांश लोगों में पैनिक अटैक होने का खतरा भी देखा जाता रहा है।
कई तरह की दिक्कतों का खतरा
एगोराफोबिया से पीड़ित लोगों को भीड़-भाड़ या प्रतिकूल जगहों पर जाने के कारण कई बार बहुत अधिक एंग्जाइटी या डर लग सकता है। डर इतना बढ़ जाता है कि इसके कारण पैनिक डिसऑर्डर की भी समस्या हो सकती है। इसके अलावा भी आपको कई तरह की दिक्कतों का अनुभव होने लगता है जैसे हृदय गति काफी बढ़ जाना, सांस लेने में परेशानी या घुटन महसूस होना, सीने में दर्द, चक्कर आना, कंपकंपी या झुनझुनी महसूस होना, बहुत ज्यादा पसीना आना आदि।
इस तरह की समस्याओं के कारण एगोराफोबिया के शिकार लोगों के लिए कही जा पाना कठिन हो जाता है। ये समस्या आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ को भी प्रभावित करने लगती है।
क्यों होती है ये समस्या?
एगोराफोबिया होने के लिए कई कारणों को जिम्मेदार माना जा रहा है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को फोबिया की दिक्कत रही है उनमें इस तरह की दिक्कतों का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। इसके अलावा मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली जैसे कुछ रसायनों जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के असंतुलन के कारण आपको स्ट्रेस-एंग्जाइटी सहित फोबिया की समस्या हो सकती है।
जिन व्यक्तियों को पैनिक अटैक होते हैं, उनमें एगोराफोबिया विकसित होने की आशंका अधिक होती है।
जिन लोगों को फोबिया हो उन्हें क्या करना चाहिए?
एगोराफोबिया एक जटिल स्थिति है हालांकि कुछ उपायों की मदद से इसमें सुधार किया जा सकता है। टॉक थेरेपी और कुछ प्रकार की दवाओं की मदद से लक्षणों को कंट्रोल करने में भी मदद मिल सकती है। एंटी-एंग्जाइटी वाली दवाएं इस फोबिया की रोकथाम में काफी लाभकारी हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को भीड़ वाली जगहों पर जाने से डर लगता हो या ये समस्या आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ को प्रभावित कर रही है उन्हें एक बार अपने मनोचिकित्सक की सलाह जरूरी हो जाती है।
