नई दिल्ली:– आज देशभर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की धूम रहेगी। मंदिरों से लेकर घरों तक भक्त लड्डू गोपाल के जन्म का इंतजार करेंगे। जन्माष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और आधी रात को भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का जन्मोत्सव मनाते हैं। अगर आप भी आज रात लड्डू गोपाल की पूजा करने वाले हैं, तो पूजा का शुभ मुहूर्त जरूर जान लें, क्योंकि आज पूजा के लिए विशेष रूप से 45 मिनट का समय रहेगा।
कब से कब तक रहेगा जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त?
द्रिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी।
वहीं भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। यानी भक्तों को लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव और विशेष पूजा के लिए कुल 45 मिनट का समय मिलेगा।
इसी शुभ अवधि में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का अभिषेक, श्रृंगार, झूला झुलाने और आरती जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
रोहिणी नक्षत्र में मनाई जा रही जन्माष्टमी
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी के पर्व में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है।
जानकारी के अनुसार, आज रोहिणी नक्षत्र रात 12 बजकर 29 मिनट पर शुरू हुआ और इसका समापन रात 11 बजकर 4 मिनट पर होगा। ऐसे में जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण की पूजा और जन्मोत्सव का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है।
जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा
जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और सात्विक रहते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर और पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करके उसे फूलों और दीपक से सजाएं।
रात में शुभ मुहूर्त के समय सबसे पहले लड्डू गोपाल को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से बने पंचामृत से उनका अभिषेक करें।
अभिषेक के बाद बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाएं। उनका मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से श्रृंगार करें। इसके बाद उन्हें सुंदर झूले में विराजमान कराकर झूला झुलाएं।
अंत में धूप-दीप जलाकर आरती करें और भगवान को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल शामिल करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद प्रसाद बांटकर व्रत खोला जा सकता है।
पूजा के लिए क्या-क्या सामग्री रखें?
जन्माष्टमी की पूजा के लिए पहले से पूजन सामग्री तैयार कर लेना बेहतर रहता है। इसके लिए लड्डू गोपाल की मूर्ति, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, चंदन, रोली, अक्षत, धूप, दीपक, कपूर और ताजे फूल रख सकते हैं।
अभिषेक के लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत तैयार करें। भगवान के भोग के लिए माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और मिठाई रख सकते हैं।
जन्माष्टमी पर इन मंत्रों का करें जाप
पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं—
कृं कृष्णाय नमः
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः
गोकुलनाथाय नमः
ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नमः
जन्माष्टमी की रात कर लें ये 2 उपाय
- केसर वाले दूध से करें अभिषेक
जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के बाद लड्डू गोपाल का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का वातावरण बना रहता है। - भगवान कृष्ण को अर्पित करें पान
जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण को पान का पत्ता अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि अगले दिन इस पत्ते पर रोली से श्री यंत्र बनाकर उसे तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है।
ध्यान रखें कि ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें श्रद्धा और आस्था के साथ किया जाता है।
