नई दिल्ली:– भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था ने एक नया इतिहास रच दिया है। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार, देश में पहली बार स्कूल शिक्षकों की संख्या 1.02 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। वहीं, पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले (ड्रॉपआउट) छात्रों की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव नई शिक्षा नीतियों, स्कूलों की बढ़ती पहुंच और शिक्षा सुविधाओं में सुधार का परिणाम है।
पहली बार 1.02 करोड़ के पार पहुंचे शिक्षक
शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में देशभर के स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या 1.02 करोड़ से अधिक हो गई है। वर्ष 2022-23 की तुलना में यह 8.3 प्रतिशत की वृद्धि है। माना जा रहा है कि शिक्षकों की बढ़ती संख्या से छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार होगा और शिक्षा की गुणवत्ता को नई मजबूती मिलेगी।
ड्रॉपआउट रेट में आई बड़ी गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों की तुलना में स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की गई है।
प्रिपरेटरी स्तर पर ड्रॉपआउट रेट 2.3% से घटकर 1.8% रह गया।
माध्यमिक स्तर पर सबसे बड़ा सुधार देखने को मिला, जहां ड्रॉपआउट रेट 8.2% से घटकर 7.0% हो गया।
शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह संकेत है कि अब स्कूल बच्चों के लिए पहले की तुलना में अधिक सुलभ, सुरक्षित और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप बन रहे हैं।
स्कूलों में बढ़ी बच्चों की टिके रहने की दर
रिपोर्ट में छात्रों की Retention Rate में भी सुधार दर्ज किया गया है।
मिडिल स्तर पर यह दर 82.8% से बढ़कर 83.7% हो गई।
माध्यमिक स्तर पर बड़ा सुधार देखने को मिला, जहां यह 47.2% से बढ़कर 51.9% पहुंच गई।
सरकार के अनुसार, माध्यमिक स्तर के स्कूलों की संख्या बढ़ने और शिक्षा सुविधाओं में सुधार के कारण अधिक छात्र अब अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।
नामांकन में भी हुआ इजाफा
रिपोर्ट के मुताबिक, माध्यमिक स्तर पर ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) भी बेहतर हुआ है। यह 2024-25 के 68.5 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 71.7 प्रतिशत हो गया है। इससे स्पष्ट है कि अब पहले की तुलना में अधिक बच्चे माध्यमिक शिक्षा तक पहुंच रहे हैं।
क्या है UDISE+?
UDISE+ (Unified District Information System for Education Plus) भारत सरकार का आधिकारिक डिजिटल डेटाबेस है, जिसे शिक्षा मंत्रालय संचालित करता है। इसके माध्यम से देशभर के स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्रों के नामांकन, शिक्षकों की संख्या और अन्य शैक्षणिक आंकड़ों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। यह रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक स्कूलों द्वारा ऑनलाइन उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है।
कुल मिलाकर, UDISE+ 2025-26 की रिपोर्ट भारतीय स्कूली शिक्षा व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आई है। शिक्षकों की रिकॉर्ड संख्या, ड्रॉपआउट में कमी और बढ़ती नामांकन दर यह दर्शाती है कि देश में शिक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है।
