आखिर क्या है सुपर अल नीनो जिससे डरी हुई है सरकार, पीएम को करनी पड़ गई मीटिंग, कितना है खतरनाक…

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नई दिल्ली:– प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार (11 जून) को राजधानी दिल्ली में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता की। देश सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के सामने भारत के भविष्य का रोड़मैप पेश किया। उन्होंने अपने संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर धोखाधड़ी, ड्रग्स की समस्या जैसे मुद्दे उठाए।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में सुपर अल नीनो (Super El Nino)को लेकर भी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि भारत की ओर एक बड़ा खतरा आ रहा है जिससे निपटने के लिए देश की लोगों को एक होना पड़ेगा। उनके मुताबिक, यह खतरा इतना बड़ा है कि अगर इससे निपटने में थोड़ी सी भी लापरवाही हुई तो नुकसान का केवल आर्थिक ही नहीं जान माल का भी होगा। तो ऐसे में सवाल उठता है कि सुपर अल नीनो क्या है? सरकार इससे इतनी डरी हुई क्यों है? सबसे बड़ा सवाल यह कितना खतरनाक है?
क्या है सुपर अल नीनो?
सुपर अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमीय घटना है, जो अल नीनो का व्यापक रूप है। यह तब होता है जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म हो जाता है। यह गर्माी न सिर्फ प्रशांत महासागर में रहने वाले जीवों को प्रभावित करता है बल्कि इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। जब यह प्रभाव बहुत मजबूत हो जाता है, तो उसे सुपर अल नीनो कहा जाता है और इसके परिणाम काफी बुरे होते हैं।
आसान भाषा में कहें तो महासागर पृथ्वी के मौसम को नियंत्रित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। लेकिन जब समुद्र का तापमान अचानक बढ़ जाता है, तो हवा, बादल, बारिश के पैटर्न में बड़े बदलाव होते हैं। ये इतने खतरनाक होते हैं कि सुखा, अकाल और भुखमरी जैसी स्थिति भी पैदा कर सकते हैं।

सुपर अल नीनो का भारत पर असर?
सुपर अल नीनो के कारण भारत में इस मानसून कमजोर हो सकता है। इससे कुछ क्षेत्रों में कम बारिश होती है, जिससे सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। कई इलाकों में गर्मी हवाएं (लू) सामान्य से अधिक समय तक चल सकती हैं। इसके अलावा इसका किसानों की फसलों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, दुनिया के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश और बाढ़ भी आ सकती है।
सुपर अल नीनो का असर सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं रहता। इससे गर्मी भी बढ़ सकती है और कई देशों में तापमान सामान्य से अधिक हो सकता है। भारत में उत्तर भारतीय राज्यों उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और बिहार में जहां पहले से ही भीषण गर्मी पड़ रही हैं, वहां इसके असर से हालात और गंभीर हो सकते हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) और विशेषज्ञों के अनुसार, अल-नीनो के कारण इस साल मानसून कमजोर रह सकता है, जिससे बारिश औसत से 10 फीसदी कम होने की आशंका है। इसका सीधा असर कृषि क्षेत्र, खासकर धान की फसल पर पड़ेगा।
सूखा पड़ना: भारत जैसे कई देशों में बारिश कम हो सकती है। इससे खेतों में पानी की कमी हो जाती है और फसलें खराब हो सकती हैं। किसानों को भारी नुकसान होता है।

बाढ़ और भारी बारिश: कुछ देशों में इसके उलट बहुत ज्यादा बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ आ जाती है। घर, सड़कें और फसलें डूब सकती हैं।

गर्मी बढ़ना: सुपर अल नीनो के समय तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ सकता है। इससे तेज गर्मी और हीटवेव की समस्या हो सकती है, जो सेहत के लिए खतरनाक होती है।

पानी की कमी: बारिश कम होने से नदियां, तालाब और जलाशय सूख सकते हैं। पीने के पानी की समस्या भी बढ़ सकती है।

खेती पर असर: क्योंकि बारिश और तापमान असंतुलित हो जाते हैं, इसलिए धान, गेहूं जैसी फसलों की पैदावार कम हो सकती है।

जंगलों में आग: ज्यादा गर्म और सूखा मौसम होने से जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।

आर्थिक नुकसान: कृषि, बिजली उत्पादन, पानी की सप्लाई और कई उद्योगों पर असर पड़ता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव आता है।

अल नीनो एक प्राकृतिक मौसम की घटना है, जिसे हम रोक नहीं सकते। इसलिए सुपर अल नीनो से पूरी तरह बचना संभव नहीं है, लेकिन इसके नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है।
सुपर अल नीनो से बचने के लिए सबसे पहले मौसम विभाग की जानकारी और चेतावनी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। जब पता चलता है कि अल नीनो या सुपर अल नीनो आने वाला है, तो लोग पहले से तैयारी कर सकते हैं।

पानी की बचत: सुपर अल नीनो में बारिश कम होने पर पानी की कमी हो सकती है, इसलिए पानी को सोच-समझकर इस्तेमाल करना चाहिए। बारिश का पानी जमा करना (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) भी बहुत मदद करता है।

खेती के तरीकों में बदलाव: किसानों को अपने खेती करने के तरीकों पर बदलाव करने होगा। उस समय कम पानी वाली फसलें जैसे बाजरा और ज्वार उगाना बेहतर होता है। साथ ही सही समय पर बुआई और वैज्ञानिक सलाह लेना भी जरूरी है।

पेड़ लगाना बहुत जरूरी: क्योंकि पेड़ वातावरण को ठंडा रखते हैं और मौसम को संतुलित करने में मदद करते हैं।

इसके अलाावा गर्मी से बचने के उपाय जैसे दोपहर में घरों में रहना। सिर ढक कर बाहर निकलना, लगातार पानी पीते रहना, अधिक पानी वाले फल जैसे तरबूज, स्ट्रॉबेरी, खरबूज और संतरे का सेवन करना ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। इसके अलावा सरकार की ओर से जारी चेतावनियों को ध्यान से सुनकर उस पर अमल करके भी सुपर अल नीनो से बचा जा सकता है।