नई दिल्ली : खाना बनाने की प्रक्रिया के ये छोटे-छोटे कदम सुनिश्चित करते हैं कि भोजन न केवल स्वादिष्ट बने, बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर भी हो। दरअसल, भोजन एक दवा है और इसे बनाते समय सही स्टेप्स को फॉलो न करने से आपके आहार और स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ सकता है।
वसुंधरा वाथम
खाना पकाना एक कला है। जिसने इस कला को जान लिया, वह पाक कला में माहिर हो गया। मगर जब भी आप रेसिपी बुक खोलती हैं, आपको विभिन्न प्रांतों, देशों और संस्कृतियों की ढेर सारी रेसिपी देखने को मिलती हैं। आप किसी एक रेसिपी को पढ़ती हैं, किचन में जाती हैं और लग जाती हैं उसे बनाने में। लेकिन जब वह तैयार हो जाती है तो उसमें वह स्वाद नहीं आता, जो आपने कभी चखा था।
असल में, हर राज्य, क्षेत्र और समुदाय का खाना बनाने का अपना अलग तरीका होता है। ऐसे में एक ही पकवान की विधि में कुछ अंतर भी हो सकता है। हर राज्य में अलग-अलग पकवान भी होते हैं, जो विशेष अवसरों पर बनाए जाते हैं। ऐसे में उनके खाने का स्वाद, सामग्री और विधियां एक-दूसरे से पूरी तरह अलग होती हैं।
आज के समय में वैश्वीकरण और डिजिटलीकरण की वजह से आप किसी भी देश के पकवान को घर पर आराम से बना सकती हैं, जिसके लिए इंटरनेट पर सैकड़ों रेसिपी वीडियो, ब्लॉग और वेबसाइट्स मौजूद हैं। ये आपको दुनिया भर की खाद्य संस्कृतियों के बारे में जानने और उनका आनंद लेने का अवसर देती हैं। लेकिन कमी है तो समय की। किसी के पास आज इतना भी समय नहीं है कि वह तसल्ली से खाना बना पाए। ऐसे में खानपान की पौष्टिकता में बदलाव लाना काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
दूसरा पक्ष यह भी है कि आज की महिलाएं कामकाजी होने की वजह से पौष्टिकता पर ध्यान नहीं दे पातीं, जिसका परिवार के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए आपको खाना बनाने की जानकारी होना बेहद जरूरी है, क्योंकि खाना बनाने के कुछ महत्वपूर्ण स्टेप्स होते हैं, जिनको सही तरीके से फॉलो न करना भोजन के स्वाद के साथ-साथ सेहत पर भी असर डाल सकता है।
खाना बनाने की प्रक्रिया के ये छोटे-छोटे कदम सुनिश्चित करते हैं कि भोजन न केवल स्वादिष्ट बने, बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर भी हो। दरअसल, भोजन एक दवा है और इसे बनाते समय सही स्टेप्स को फॉलो न करने से आपके आहार और स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ सकता है।
ताजी सामग्री का चयन
खाना बनाने की सबसे पहली और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है- सही और ताजी सामग्रियों का चुनाव। ताजी और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री न केवल खाने का स्वाद बेहतर बनाती है, बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करती है। इसलिए किसी भी रेसिपी को बनाते समय सुनिश्चित करें कि सभी सामग्री ताजी हों, ताकि आपका खाना न केवल स्वादिष्ट बने, बल्कि सेहत को भी लाभ पहुंचाए।
साथ ही किसी भी भोजन का स्वाद और पोषण इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप जो सामग्री इस्तेमाल कर रही हैं, वह ताजा, गुणवत्तापूर्ण और सही तरीके से चुनी गई हो। अगर आप सामग्री का सही चुनाव नहीं करेंगी तो न केवल खाने का स्वाद प्रभावित होगा, बल्कि उससे मिलने वाले पोषक तत्व भी आपको प्राप्त नहीं होंगे। इसलिए जहां तक हो सके, आप सब्जियों से लेकर मासलों तक सभी सामग्री ताजी ही चुनें।
सही आकार में कटी और धुली
खाना स्वादिष्ट बने, इसके लिए सब्जियों का सही आकार में कटा होना जरूरी है। सब्जियों को सही तरीके से काटने से भोजन का स्वाद बेहतर होता है, पकाने की प्रक्रिया भी प्रभावी होती है और पोषक तत्व भी अधिक मात्रा में बरकरार रह पाते हैं। साथ ही हर तरह की सब्जी को उसके आकार और बनावट के अनुसार काटकर बनाने से उसमें सभी मसाले और अन्य फ्लेवर बेहतर तरीके से रम पाते हैं और भोजन का स्वाद भी बढ़ जाता है।
मसलन, प्याज और टमाटर को छोटे टुकड़ों में काटने से वे जल्दी पकते हैं और मसाले के साथ अच्छी तरह मिक्स हो जाते हैं, जिससे भोजन में एक बेहतरीन फ्लेवर आता है। वहीं जब आप सब्जियों को अच्छी तरह धोकर बनाती हैं तो उनमें मौजूद बैक्टीरिया निकल जाते हैं।
तेल और मसाले पकाने का समय
किसी भी तरह का व्यंजन बनाते समय तेल या घी को अधिक गरम करके उसमें सब्जी या कोई भी खाद्य पदार्थ तलने से उसके पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं और उसमें तला गया खाना अधिक वसा अवशोषित करता है, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। वहीं अगर तेल कम गरम होगा तो खाना ठीक से नहीं पक सकेगा और उसका स्वाद भी खराब हो जाएगा। इसलिए तेल या घी को मध्यम आंच पर गरम करना चाहिए और तलते वक्त उसे बार-बार गरम करने से बचना चाहिए।
साथ ही ज्यादा देर तक भोजन तलने से वह कुरकुरा हो जाता है और उसमें वसा तथा कैलोरी की मात्रा भी बढ़ जाती है, इसलिए भोजन को सही तापमान पर और निर्धारित समय तक ही पकाना चाहिए।
स्वाद और पोषण
हर रेसिपी में मसाले, नमक, मिर्च और पानी का सही संतुलन होता है। अगर आप किसी भी तत्व को अधिक या कम डालती हैं तो खाना बहुत तीखा, खट्टा या स्वादहीन बन सकता है। खाना पकाने की प्रक्रिया में अगर आप एक भी तत्व को अधिक या कम करती हैं तो इससे उनमें मौजूद विटामिन, खनिज, कैलोरी और स्वास्थ्यवर्धक तत्व नष्ट हो सकते हैं। इसलिए जब रेसिपी में कहा जाता है कि एक छोटा चम्मच मिर्च या गरम मसाला डालें तो इसका मतलब है कि आपको उतना ही इस्तेमाल करना है। रेसिपी में दिए गए निर्देशों का पालन न करने से भोजन में सही बनावट और स्वाद नहीं आ पाता, साथ ही पोषक तत्वों के नष्ट होने की भी आशंका भी बढ़ जाती है।
पानी और तरल का संतुलन
जब आप कोई रेसिपी देखकर करी, सूप या स्टू जैसी चीज बनाती हैं तो रेसिपी में दी गई पानी या अन्य तरल पदार्थों की मात्रा को ध्यान से फॉलो करना जरूरी है। बहुत अधिक पानी डालने से वह पतला हो सकता है और स्वाद में कमी आ सकती है। कम पानी डालने से वह जल सकता है या फिर ठीक से पक नहीं पाता, जिससे आपको सही पोषण प्राप्त नहीं हो पाते हैं। इसलिए दही, नारियल का दूध, टमाटर का पेस्ट और पानी जैसे तरल पदार्थों का सही समय पर और सही मात्रा में उपयोग करने से स्वाद में इजाफा होता है, जो आपके स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है।
किस तापमान पर परोसें
कुछ खाद्य पदार्थों का स्वाद और खुशबू केवल तब तक बेहतर रहती है, जब तक वे गरम रहते हैं। खाने को ज्यादा देर तक रखकर ठंडा करने से न केवल उसका स्वाद खराब हो सकता है, बल्कि उसमें हानिकारक बैक्टीरिया भी बढ़ सकते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे कि सूप गरम परोसे जाते हैं तो आपको सही पोषण मिल पाता है। वहीं सलाद और दही ठंडा परोसने से स्वाद में इजाफा होता है, मगर ठंडा करने से पहले इनको ठीक से कवर करके रखें, ताकि इनमें बैक्टीरिया न पनप सकें।
स्वास्थ्य और सुरक्षा
रेसिपी के निर्देशों में बहुत ध्यान से खाना बनाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाता है। इसमें कच्चे और पके खाद्य पदार्थों को अलग रखने, हाथ धोने और बर्तनों को साफ रखने जैसी बातें भी शामिल होती हैं। ये सभी कदम खाने को सुरक्षित और स्वस्थ बनाए रखने के लिए होते हैं। अगर हम खाने को उचित तापमान पर नहीं पकाते हैं तो उसमें बैक्टीरिया और वायरस विकसित हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए रेसिपी के स्टेप्स को फॉलो करना न केवल खाना बनाने की कला को बेहतर बनाता है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी बहुत जरूरी है।
भोजन से ही सेहत है
कुकरी एक्सपर्ट सरिता खुराना बताती हैं, हमारे देश में सभी प्रांतो का खाना अपने आप में लाजवाब है, लेकिन आधुनिक युग में खानपान की पौष्टिकता पर कोई ध्यान ही नहीं देता। अगर आप हर सब्जी में टमाटर डालती हैं तो ध्यान दें कि केवल उसके गूदे का उपयोग करें और बीज को निकाल दें। आप पहाड़ी टमाटर का इस्तेमाल कर सकती हैं, क्योंकि उसमें गूदा ज्यादा और बीज कम होते हैं।
आप तेल को अधिक गरम न करें, क्योंकि इससे आपके भोजन का स्वाद खराब हो सकता है, लेकिन सरसों के तेल को स्मोकिंग पॉइंट यानी ज्यादा गरम करने से सब्जी में कड़वापन नहीं आता है।
कच्ची सब्जियों को गरम पानी में धोने से उसमें उपस्थित स्प्रे कम हो जाता है और सब्जी जल्दी बन जाती है।
सब्जी बनाते समय सबसे पहले प्याज, लहसुन, अदरक को भूनें। जब सब भुन जाएं, तभी टमाटर डालें और थोड़ा-सा नमक डालकर भूनें। इसके बाद हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और अंत में गरम मसाला डालें।
वहीं आप जब दाल बनाने वाली हों तो उसे पकाने से पहले दो से तीन घंटे पानी में भिगोकर रखें, इससे उसकी पौष्टिकता बढ़ जाती है। साथ ही आपको समझना होगी कि कुकर में भोजन कभी बनता नहीं है, केवल गलता है, जिस वजह से उसकी सारी पौष्टिकता नष्ट हो जाती है, इसलिए धीमी आंच पर खाना पकाएं। धीमी आंच पर पके भोजन में न्यूट्रिशन वैल्यू बनी रहती है।
चावल बनाते समय पहले उसे पानी में कुछ समय के लिए भिगो दें और बनाते समय आधा नींबू निचोड़ दें। इससे चावल खिले-खिले बनते हैं।
आप मिक्सी में किसी भी तरह की चटनी बनाते समय उसमें थोड़ा-सा मक्खन डाल दें तो चटनी जार से जल्दी निकल जाती है और उसका स्वाद भी बढ़ जाता है।
आप पनीर को मेरिनेट करते समय उसमें अनारदाने का पेस्ट डाल दें तो वह और अधिक स्वादिष्ट बन जाता है।
इडली या डोसा का बैटर बनाते समय उसमें मेथीदाने का उपयोग अवश्य करें। इससे डोसा बहुत क्रिस्पी बन जाता है। पाव-भाजी बनाते समय स्वीट कॉर्न का इस्तेमाल करने से आपको एक नया स्वाद मिल सकता है। साथ ही आप गरम मसाला पीसते समय उसमें सूखे धनिए का उपयोग न करें, क्योंकि खाना बनाते समय यह मसाला पकने से पहले जलना शुरू हो जाता है।
आप आटे या सूजी का हलवा बनाते समय ध्यान दें कि घी को अधिक गर्म न करें, क्योंकि इससे हलवे का पूरा स्वाद खराब हो सकता है।
