नई दिल्ली : प्रदूषण बढ़ने के कारण कई लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह एक हेल्थ इमरजेंसी है। यह समस्या पिछले एक दशक से लगातार चली आ रही है।
500 पार जा रहे एक्यूआई के चलते दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया है। सोमवार को पूरे दिन दिल्ली समेत कई जगहों पर धुंध छाई रही। प्रदूषण बढ़ने के कारण कई लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह एक हेल्थ इमरजेंसी है। यह समस्या पिछले एक दशक से लगातार चली आ रही है। प्रदूषण को नियंत्रण करने को लेकर सरकार की पिछले एक दशक की सभी योजनाएं विफल साबित हुई हैं।
यह विफलता सरकार के लचर ढांचें और चरमराती व्यवस्था की गवाही है। प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जब सरकार से सवाल किया जाता है तो आरोप-प्रत्यारोप का दौर चालू हो जाता है। लोगों की जान से ज्यादा राजनीति को महत्व दिया जा रहा है। वहीं इन बयानबाजियों के उलट पड़ोसी देश चीन ने बड़ी योजनाबद्ध ढंग से अपने देश में प्रदूषण की समस्या को खत्म किया है।
साल 2005 में लांसेट की एक रिपोर्ट में चीन की राजधानी बीजिंग को वायु प्रदूषण का कैपिटल कहा गया था। इस दौरान चीन में वायु प्रदूषण की वजह से हर साल बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही थी। इसी को देखते हुए चीन ने साल 2013 में वायु प्रदूषण के खिलाफ जंग की शुरुआत की। इस दौरान उसने नेशनल एयर क्वालिटी एक्शन प्लान लागू किया। इसको लेकर सरकार ने 19 हजार करोड़ की योजनाओं को मंजूरी दी।
इस समस्या से निजात पाने के लिए प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए। वायु प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों को शहर से दूसरी जगह पर शिफ्ट किया गया। यही नहीं कुछ कारखानों पर तो पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके अलावा इन कारखानों में कोयले का उपयोग करने पर प्रतिबंध लगाया गया। पुरानी गाड़ियों को चलाने पर रोक लगाकर इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन देश में बढ़ाया गया।
शहरों में वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के गलियारे बनाए गए। बीजिंग में साल 2013 में स्कूलों, अस्पतालों और घरों में कोयले का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर ईंधन के रूप में किया जाता था। इस पर सरकार ने रोक लगा दी और इसकी जगह प्राकृतिक गैस और हीटर को बढ़ावा दिया गया। इन प्रयासों के बाद चीन में प्रदूषण के स्तर में गिरावट देखने को मिली। साल 2013 में जहां पीएम 2.5 वायु प्रदूषण का स्तर 101.56 माइक्रोग्राम था वहीं साल 2023 में यह गिरकर 39 माइक्रोग्राम रह गया।
बीते लंबे समय से दिल्ली एनसीआर और देश के बाकी इलाकों में प्रदूषण की समस्या परेशान करती आ रही है। चीन ने जिस तरह से प्रदूषण के खिलाफ जंग की शुरुआत की और उसमें सफलता पाई उससे हम कई चीजें सीख सकते हैं। मसलन बीजिंग की तरह ही देश में ईंधन से चलने वाली गाड़ियों को लेकर कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके अलावा सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में कई सकारात्मक फैसले ले सकती है।
