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गायों के लिए अपनी जान दे सकती है यह जनजाति, जानिए इनके बारे में रोचक बातें…

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नई दिल्ली : जनजाति के लोग गाय को अपनी जिंदगी मानते हैं। इस जनजाति में जिनके पास गाय नहीं होती है, उनको मृतक जैसा समझा जाता है। इस जनजाति के लोग गायों को बहुत ज्यादा मानते हैं, क्योंकि वह गायों को पैसों का भंडार मानते हैं।

दुनिया में कई रहस्यमयी जनजातियां पाई जाती हैं। इनके बारे में बेहद कम लोगों को ही जानकारी है। यह जनजातियां अपनी परंपराओं, रहन-सहन और खान-पान के लिए जाना जाती है। एक तरफ जहां लोग आधुनिक युग में अपनी परंपराओं को भूलते जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ यह आदिवासी प्रजातियां अभी भी अपनी हजारों साल पुरानी परंपराओं का पालन करती हैं। यह जनजातियां जहां पर रहती हैं वहां इनका अधिकार होता है। इनके अधिकारों में सरकारें भी दखल नहीं देती हैं।

आज हम आपको एक ऐसी ही जनजाति के बारे में बताएंगे, जो गायों के लिए किसी की जान भी ले सकते हैं। इस जनजाकि के लोग गायों की रक्षा AK 47 जैसी खतरनाक हथियार से करते हैं। यह जनजाति अफ्रीकी देश सूडान में रहती है, जिसका नाम मुंदरी ट्राइब है। यह गाय को अपना सबकुछ मानते हैं। सूडान के मुंदरी जनजाति के इलाके में गायों पर कोई खतरा आ जाए, तो लोग जान लेकर या जान देकर गाय की रक्षा करते हैं।

इस जनजाति के लोग गाय को अपनी जिंदगी मानते हैं। इस जनजाति में जिनके पास गाय नहीं होती है, उनको मृतक जैसा समझा जाता है। इस जनजाति के लोग गायों को बहुत ज्यादा मानते हैं, क्योंकि वह गायों को पैसों का भंडार मानते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन मुंदरी जनजाति के लोग अपने मवेशियों के साथ ही सोते हैं। कोई उनके मवेशी को मार न दे या फिर चुरा न ले, इसलिए एके 47 जैसे खतरनाक हथियार से दिन-रात सुरक्षा करते हैं।

मुंदरी जनजाति के लोग गायों को मवेशियों का राजा कहते हैं। यहां की गायों की लंबाई सामान्य गायों से अधिक होती है। यहां गायों की ऊंचाई सात से आठ फीट होती है, तो लंबाई इससे भी अधिक है।

गो-हत्या सबसे बड़ा पाप

यहां पर लोग गो हत्या को सबसे बड़ा पाप मानते हैं। यहां पर लोगों को शादियों में गाय भी मिलती हैं। यहां के लोगों के लिए गाय सबकुछ होती हैं। यहां पर अपने बच्चों की देखभाल भलें ही न करें, लेकिन गायों की देखभाल में कोई कमी नहीं रखते हैं। गाय को गर्मी से बचाने के लिए उसे भभूत भी लगाते हैं। लोग गाय के गोबर और मूत्र को बेहद शुद्ध और पवित्र मानते हैं।

गोमूत्र से लोग अपना सिर धोते हैं और गोबर से दांत साफ करते हैं। गोबर को सुखाकर पाउडर की तरह इस्तेमाल भी करते हैं। मुंदरी जनजाति के लोग गोमूत्र भी पीते हैं। वह मानते हैं कि इससे उनकी गंदगी दूर होती है।