नई दिल्ली : कैंसर के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। पुरुष हो या महिला, बच्चे हों या बुजुर्ग, सभी लोगों में कैंसर और इसके जोखिम कारक देखे जाते रहे हैं। पुरुषों में लंग्स और प्रोस्टेट जबकि महिलाओं में स्तन-ओवरी और सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते हैं।
आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2022 में, दुनियाभर में महिलाओं में कैंसर से मृत्युदर प्रति एक लाख लोगों पर 76.4 थी। स्तन कैंसर महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण था, वहीं ओवेरियन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
हालांकि महिलाओं में कैंसर के खतरे को कम करने की दिशा में एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, ओवेरियन कैंसर के लिए दुनिया का पहला टीका यूके में विकसित किया जा रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि टीके से इस घातक बीमारी के जोखिमों को पूरी तरह से खत्म करने में मदद मिल सकती है।
अगर ये टीका परीक्षणों में सफल रहता है तो हर साल ओवेरियन कैंसर के कारण होने वाली लाखों मौतों को रोका जा सकता है।
ओवेरियन कैंसर के लिए वैक्सीन
वैज्ञानिकों की टीम ने इस वैक्सीन को ‘ओवेरियनवैक्स’ नाम दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर के खिलाफ निवारक उपाय के रूप में महिलाओं को यह टीका दिया जाएगा। इसकी मॉडलिंग उसी तरह से की गई है जैसा कि सर्वाइकल कैंसर की एचपीवी वैक्सीन की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार टीके को इस तरह से निर्मित किया जा रहा है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ओवेरियन कैंसर को शुरुआत में ही पकड़ ले और कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोके या नष्ट कर दे।
कैंसर कोशिकाओं को पहचानेगी वैक्सीन
ओवेरियनवैक्स टीके के बारे में जानकारी देते हुए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ओवेरियन कैंसर सेल लेबोरेटरी के निदेशक डॉ. अहमद अहमद ने बताया, ये वैक्सीन सेलुलर टारगेट की तरह काम करेगी। वैज्ञानिकों की टीम ये समझने की कोशिश कर रही है कि प्रारंभिक चरण में कैंसर कोशिकाओं की सतह पर कौन से प्रोटीन हो सकते हैं, जिन्हें वैक्सीन सबसे जल्दी पता लगा सकती है। इसके आगे के चरणों में वैक्सीन के माध्यम से उन कोशिकाओं को लक्षित करने पर काम किया जाएगा, जो कैंसर का कारण बन सकती हैं।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
डॉ अहमद कहते हैं, अगर टीका सफल रहता है तो अगले पांच साल के भीतर इसके परिणाम देखने को मिल सकते हैं। ये टीके वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए इस बड़े जोखिम को कम करने में मददगार हो सकते हैं। हमारा लक्ष्य इस कैंसर को पूरी तरह से खत्म करने का है, उम्मीद है कि ये वैक्सीन इस दिशा में काफी अच्छे परिणाम दे सकती है। हालांकि हमें अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है।
वैक्सीन का लक्ष्य ओवेरियन कैंसर की सतह पर 100 से अधिक प्रोटीनों को पहचानने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना है।
भारत में भी ओवेरियन कैंसर का बढ़ रहा है खतरा
ओवेरियन कैंसर कई मामलों में गंभीर चिंता का कारण है। ये भारतीय महिलाओं में तीसरा सबसे आम कैंसर है। चूंकि इस कैंसर के लिए कोई विशिष्ट स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं है और लक्षण भी अन्य पेट के रोगों से मिलते-जुलते हो सकते हैं, यही कारण है कि इसका समय पर निदान भी नहीं हो पाता है।
कैंसर रिसर्च यूके में अनुसंधान के प्रमुख डॉ डेविड क्रॉस्बी ने कहा कि किसी भी संभावित वैक्सीन के व्यापक उपयोग के लिए तैयार होने में कई साल लग सकते हैं। इस टीके को लेकर वैज्ञानिकों की टीम आशावादी है, उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हम ओवेरियन कैंसर को कम करने में सफलता पा सकते हैं।
